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त्रिफला

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Monday, June 24, 2019, 07:45 PM
Triphala

त्रिफला
    हममें से में त्रिफला चूर्ण महत्व के बारे में कौन नहीं जानता, पर इस चूर्ण से मानव अपने शरीर का कायाकल्प कर सालों तक निरोग रह सकते है, यह बहुत कम लोग जानते है।
    त्रिफला के चूर्ण का विधिवत नियमित सेवन हमारे शरीर का कायाकल्प कर देता है। यह मानव जाति के लिए अमृततुल्य है, साथ ही वात, पित्त व कफ- त्रिदोष नाशक व रसायन है।
सेवन विधि-
    सुबह हाथ मुंह धोने व कुल्ला आदि करने के बाद खाली पेट ताजे पानी के साथ इसका सेवन करें तथा सेवन के एक घंटे तक पानी के अलावा कुछ ना लें। इस नियम का कठोरता से पालन करें। आप कायाकल्प के लिए नियमित इसका इस्तेमाल कर रहे है तो विभिन्न वस्तुएं मिलाकर लें। हमारे यहां वर्ष भर में छह ऋतुएं होती है और प्रत्येक ऋतु में त्रिफला का उपयोग निम्नानुसार करें-
    ग्रीष्म ऋतु- 14 मई से 13 जुलाई तक त्रिफला को गुड़ 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें।
    वर्षा ऋतु- 14 जुलाई से 13 सितम्बर तक इस त्रिदोषनाशक चूर्ण के साथ सेंधा नमक 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें।
    शरद ऋतु- 14 सितम्बर से 13 नवम्बर तक त्रिफला के साथ देशी खांड 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें।
    हेमंत ऋतु- 14 नवम्बर से 13 जनवरी के बीच त्रिफला कि साथ सोंठ का चूर्ण 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें।
    शिशिर ऋतु- 14 जनवरी से 13 मार्च के बीच पीपल छोटी का चूर्ण 1/4 भाग मिलाकर सेवन करें।
    बसंत ऋतु- 14 मार्च से 13 मई के दौरान इस चमत्कारी चूर्ण के साथ शहद मिलाकर सेवन करें। शहद उतना मिलाएं जितना मिलाने से अवलेह बन जाए।
    इस तरह इसका सेवन करने से एक वर्ष के भीतर शरीर की सुस्ती दूर होगी, दो वर्ष सेवन से सभी रोगों का नाश होगा, तीसरे वर्ष तक सेवन से नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी, चार वर्ष तक सेवन से चेहरे का सौंदर्य निखरेगा, पांच वर्ष तक सेवन के बाद बुद्धि का अभूतपूर्व विकास होगा, छह वर्ष सेवन के बाद बल बढेगा, सातवें वर्ष में सफेद बाल काले होने शुरू हो जाऐंगे और आठ वर्ष सेवन के बाद शरीर युवाशक्ति सा परिपूर्ण लगेगा।





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