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भारत का गौरव

Pratima Ramesh Meshram

Friday, January 21, 2022, 05:01 PM
Savitri Bai fule

भारत का गौरव 🙏सावित्री बाई फुले 🙏नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता,महान समाज सेविका,स्त्री शिक्षा की जननी,देश की पहली महिला शिक्षिका ज्ञान ज्योति मुख्याध्यापिका,पहले किसान स्कूल की संस्थापक, एवम् मराठी काव्य की अग्रदूत ..... सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। उनका विवाह 1840 में महात्मा ज्योतिबा फूले से हुआ था।उन्होंने अपने पति ज्योतिबा फूले के साथ मिलकर स्त्रियों के अधिकार एवम् शिक्षा के लिए बहुत से कार्य किए।1जनवरी1848 में पुणे के भिड़े वाडा में लड़कियों की पहली स्कूल शुरू कर भारतीय स्त्रियों को अंधकार मय जीवन से शिक्षण रूपी ज्योति से प्रकाशमान करने वाली क्रांतिज्योति सावित्री बाई फुले का नाम अग्रणी है।सावित्री बाई फुले एक एसी शख्स हैं जिन्होंने स्त्री शिक्षा के लिए न केवल संघर्ष किया बल्कि पहली बार उनके लिए बालिका विद्यालय की स्थापना भी की यह विद्यालय स्त्री शिक्षा की क्रांति का पहला स्तंभ बना। सावित्री बाई फुले के समक्ष अपने परिवेश की लड़कियों और उनके माता-पिता को शिक्षा के प्रति जागृत करना एक चुनौती पूर्ण कार्य था। क्योंकि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का ही विकास नहीं करती बल्कि उसे पुरातन रुढ़ी परंपरा, अनेकों कुरीतियों के मान्यताओं के गहरे भंवर से निकलकर प्रकाश की ओर लाती हैं। दृढ़ संकल्पि सावित्री बाई ने अपने जीवन को एक मिशन की तरह जीया। वह स्कूल जाती थी तो लोग पत्थर मारते थे, उन पर गंदगी फेकते थे,कीचड़ गोबर फेककर उन्हें अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती थी। रूढ़ी वादियों द्वारा किए गए घोर विरोध दुर्लभ बाधा ओ के बावजूद अपने जीवन में प्रतिदिन होने वाले सामाजिक अपमान को सहकर स्त्री शिक्षा को बढ़ावा दिया और मजबूत किया। " वे मुझ पर पत्थर ,कीचड़ मल फेकते रहे।और मैं भारत की बेटियों को पढ़ाती गई."....। सावित्री बाई पूरे देश कि महानायिका हैं। हर जाति,और धर्म के लिए उन्होंने काम किया ।वे बालिकाओं को पढ़ाने जाती थी तोएक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थी,और स्कूल पहुंचकर गंदी कर दी साड़ी बदल लेती थी। उनका जीवन संघर्ष अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा बहुत अच्छे से देता हैं।सावित्री बाई उस दौर में खुद पढ़ी लिखी बल्कि दूसरी लड़की को पढ़ाने का बंदोबस्त किया वह भी पुणे जैसे शहर में। पुरातन बेड़ियों से मुक्त कर महिलाओ को खुला आसमान दिया, जहां वह अपने सपनो को उड़ान भर सके।1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होंगा। किन्तु जिन्हे शिक्षण दिया वह आज ....इंजीनियर , डॉ.वकील ,शिक्षिका ,पुलिस, तहसीलदार, कलेक्टर,सरपंच ,नगर सेविका,नगराध्यक्ष,महापौर , मंत्री, मुख्यमंत्री,प्रधान मंत्री,इतना ही नहीं बल्कि राष्ट्रपति हुई।। भारतीय महिलाओ पर उनका उपकार है हम सदैव उनके ऋणी हैं।। 10 मार्च 1897 को प्लेग ।महामारीके कारण प्लेग पीड़ित बच्चे की सेवा करते छूत से प्रभावित ,संक्रमित होने से उनका निधन हुआ। एसी ज्ञान ज्योति महानायका को आज तक भारत रत्न अवार्ड से अभी तक नवाजा नहीं गया बल्कि इन्हे बहुत पहले ही इस सम्मान से सम्मानित किया जाना था।मैं इस अखबार के माध्यम से भारत सरकार से मांग करती हु की मातोश्री सावित्री बाई फुले को भारत रत्न अवार्ड से नवाजा जाय।। एसी विद्या की देवी नारी मुक्ति की अग्रदूत को उनकी जयंती पर उनके कार्य और विचारों को विनम्र अभिवादन।।कोटि कोटि नमन। आयुष्मति प्रतिमा रमेश मेश्राम





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