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भारतीय जनगणना 2021 में बौद्धों की जनसंख्या

Siddharth Bagde
tpsg2011@gmail.com
Saturday, March 09, 2019, 09:34 AM
भारतीय जनगणना 2021 में बाबासाहेब अम्बेडकर जी ने कहे अनुसार भारत में बौद्धों की जनसंख्या क्या 5 करोड़ होंगी ?
     2011 के सेंसेक्स के नुसार भारत की कुल आबादी 121 करोड़ के ऊपर थी और उसमें कुल बौद्धों की आबादी जनसंख्या 84,42,972 (चैरयासी लाख बयालीस हजार नवसौ बहत्तर) थी।
   बाबासाहेब नवंबर 1956 में काठमांडू नेपाल में कहते है कि, वह एक साल जिन्दा रहे तो भारत में 5 करोड़ बौद्ध दिखा देंगे, लेकिन 2011 के सेंसेक्स के आंकड़े बताते है कि हम बौद्ध भारत में अभी भी एक करोड़ के आसपास भी नही हुये है, क्या सचमुच हम अम्बेडकरवादी कहलाने के हकदार है ?
आज 2019 में हम प्रवेश करनेवाले है और 2020 से सेंसेक्स 2021 के लिये जनगणना का कार्य सुरु होंगा। भारत में बौद्ध जनसंख्या 2 करोड़ होनी चाहिये इसलिये क्या हम कार्य करने के लिए आज से ही तैयार है। क्या इसकी हमने प्लानिंग तैयारी की है? अथवा समय पर भी हम सोये हुये ही रहेंगे ?
2011 के सेंसेक्स के नुसार भारत के कुछ राज्यों की बौद्ध जनसंख्या देखते है:-
   क्या अम्बेडकरवादी कहनेवाले (नकली) हम हिन्दू धर्मं की जनसँख्या बड़ा रहे है ? इन ज्यादातर लोगो ने 2011 के जनगणना में अपना धर्मं हिन्दू लिखा। 2011 के सेंसेक्स के आकड़ो का अध्ययन करने पर, भारत में 84,42,972 बौद्ध थे। 2001 के जनगणना के अनुसार बौद्ध जनसँख्या 2011 में 0.6 प्रतिषत कम है।  बाबासाहेब भारत को बौद्ध राष्ट्र बनाना चाहते थे। भारत की जनसंख्या 2011 में 121 करोड़ है। महाराष्ट्र में 65,31,200 बौद्ध है। महाराष्ट्र में एससी समुदाय की जनसंख्या एक करोड़ 32 लाख है, उसमें 1करोड़ 20 लाख महार है. इनमें से 55 लाख महार यह शोषित हिन्दू धर्मीय हैं और बाकि के बचे 65 लाख के ऊपर बौध्द है। क्या सिर्फ महारो ने ही बौद्ध बनने और बनाने का जिम्मा ठेका लिया है।
2011 के सेंसेक्स आंकड़े बताते है कि उत्तरप्रदेश यूपी में 2 लाख 7 हजार 2 सौ 85 बौद्ध है।  यूपी की जनसँख्या लगभग 20 करोड़ है उसमे 4 करोड़ 14 लाख एससी समुदाय है, यह यूपी के एससी लोग खुद को परिवर्तनवादी और आंबेडकरवादी कहते है, लेकिन इन लोगो ने 4 करोड़ 12 लाख एससी यह शोषित हिन्दू है। इन यूपी के एससी शोषितों ने  हिन्दू धर्मं की जनसँख्या बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक प्रकार हम कह सकते हैं कि यूपी के शोषित हिंदुओं ने विश्व हिन्दू परिषद के लिए कार्य किया है। 2001 के सेंसेक्स के अनुसार यूपी में 3 लाख बौध्द थे जो 2011 में एक लाख से कम होकर 2 लाख पर सिमट गये। 2010 और 11 में यूपी में मुख्यमंत्री कौन थे? इसको हमनें जाँचना चाहिए? क्या वह विश्व हिन्दू परिषद के लिए कार्यरत थे ? यह भी हमें देखना है ?
2011 के सेंसेक्स आँकड़ो को देखें तो एमपी में 2 लाख 16 हाजर बौद्ध थे और छत्तीसगढ़ में 70 हजार बौद्ध थे। क्या यह लोग 2021 के सेंसेक्स के लिए कार्यरत होना चाहेंगे ? जिसमे बौद्ध लोगो की जनसंख्या बढ़नी चाहिए यह एकमात्र उद्देश्य हमारा होना चाहिए। इसके लिए लेख लिखने वाले और ‘‘अम्बेडकरी बौध्द’’, इस समूह के संयोजक उमेश गजभिये यह आपकी मदत के लिये हमेशा तैयार रहेंगे और साथ मे भन्तेजी धम्मशिखर, नागसेन और विनयबोधि कार्यरत रहेंगे।.
  बाबासाहेब ने हिन्दू धर्मं छोड़ने की घोषणा 1935 में की और 1956 में हिन्दू धर्मं छोड़कर बौद्ध बने, लेकिन यूपी के एससी लोग बौद्ध बनना नहीं चाहते। वह हिन्दू धर्मं में रहना पसंद करते है। यूपी जैसे ही एमपी और छत्तीसगढ़ की स्थिति है। इनकी वजह से यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में हिन्दू धर्म की जनसँख्या बढाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए सावधान बौद्धों इन नकली शोषित हिन्दू लोग और संगठनो से सावधान!  
आप खुद को अम्बेडकरवादी कहने वाले बौद्धों से अनुरोध है कि वह ‘‘बौद्ध जनगणना मिशन 2011’’ और ‘‘अम्बेडकरी बौद्ध’’ के सयोंजक उमेश गजभिये और साथी भन्तेजी धम्मशिखर, नागसेन, विनयबोधि इनसे आप सम्पर्क कीजिये और बाबासाहेब ने जो कहा वह 5 करोड बौद्ध भारत में दिखाने के लिए प्रयत्नशील आपको होना है, जिसके लिए आप को श्रम, बुद्धि, समय और पैसा भी देना है।
भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के नुसार बौद्ध, हिन्दू और सिख धर्मीय लोग ही एससी की सुविधा ले सकते है, इसलिए जनगणना में बौद्ध धर्म लिखने से आपको एससी का आरक्षण मिलेंगा इसका कानून बना है, इसलिये बौद्ध धर्म लिखने से एससी आरक्षण नही मिलेंगा इस झूठ से खुद को बचाये और सिर्फ बौद्ध धर्म लिखे और दिखे।
लेखकर्ता - उमेश गजभिये (संयोजक समन्वयक  - अम्बेडकरी बौद्ध’’ बौद्ध जनगणना मिशन 2021)
 




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