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लूट की एक और कहानी

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Monday, September 20, 2021, 06:44 PM
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लूट की एक और कहानी सुनिए ।

भारत सरकार कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (कॉनकोर) को बेचने का एलान कर चुकी है , सरकार का तर्क है कि कॉनकोर घाटे में चल रही है और अब इसे पालने से कोई फ़ायदा नहीं है । अड़ानी जी के सुपुत्र पहले ही एक इंटर्व्यू में बता चुके हैं कि कॉनकोर वो ख़रीद लेंगे , अब वो नीलामी से पहले ही इतने कॉन्फ़िडेन्स से कैसे इस कम्पनी को ख़रीदने की बात कह रहे हैं , यह तो सरकार या अड़ानी ही बता सकते हैं । कॉनकोर #भारतीय रेलवे का ही #औद्योगिक आर्म है।

कॉनकोर के 86 में से 41 ICDs (Inland #Container Depot) रेलवे की #जमीन पर बने हैँ , रेलवे की यह ज़मीने आज लाखों करोड़ रुपय की हैं । भारत सरकार ने कॉनकोर को इन जमीनों को खरीदने के लिए कहा है। अब सवाल यह है कि जो कम्पनी भारत #सरकार बेच रही है , उसी कम्पनी को रेल्वे की ज़मीन ख़रीदने का आदेश क्यों दे रही है ??

#कॉनकोर इन अरबो की रेलवे की ज़मीन को कौड़ियों के दाम यानी 8,000 करोड़ में खरीदेगा । कॉनकोर के पास पैसे नहीं है तो यह पैसा उसे बैंक से लोन में मिलेगा और फिर घाटे की कम्पनी कॉनकोर को बेच दिया जाएगा ।

बाद में आदरणीय अड़ानी जी कॉनकोर को उसके ऐसेट समेत कोड़ियों के दाम में ख़रीदेंगे , पैसे अड़ानी जी को भी बैंक ही देगा । #अड़ानी के पास पहले से #पोर्ट और #ऐयरपोर्ट हैं , कॉनकोर और उसके ड्राई पोर्ट्स भी उनके पास चले गए तो पूरे देश के निर्यात-आयात पर अडानी का एकछत्र राज होगा और आपकी रोजमर्रा की हर चीज की महंगाई सरकार की बजाय आदरणीय अडानी जी तय करेंगे ।

सरकारी संसाधनों को कितना सिस्टामेटिक तरीक़े से कम से कम पैसे खर्च करके लूटा जा रहा है , यह इसका मात्र एक उदहारण है ।

अभी भी समय है निजीकरण निगमीकरण के खिलाफ आवाज उठाओ।





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