माँ की दर्द भरी कहानी TPSG Saturday, April 27, 2019, 02:23 PM माँ की दर्द भरी कहानी मेरी माँ की सिर्फ एक ही आँख थी और इसीलिए मैं उनसे बेहद नफरत करता था। वो फुटपाथ पर एक छोटी सी दुकान चलाती थी। उनके साथ होने पर मुझे शर्मिन्दगी महसूस होती थी। एक बार वो मेरे स्कूल आई मैं फिर से बहुत शर्मिदा हुआ। वो मेरे साथ ऐसा कैस कर सकती है? अगले दिन स्कूल में सबने मेरा बहुत मजाक उड़ाया। मैं चाहता था मेरी माँ इस दुनिया से गायब हो जाये। मैंने उनसे कहा, ‘‘माँ तुम्हारी दूसरी आँख क्यों नहीं है ? तुम्हारी वजह से हर कोई मेरा मजाक उड़ाता है। तुम कर क्यों नहीं जाती? माँ ने कुछ नहीं कहा। पर, मैंने उसी पल तय कर लिया कि बड़ा होकर सफल आदमी बनूँगा ताकि मुझे अपनी एक आँख वाली माँ और इस गरीबी से छुटकारा मिल जाये। उसके बाद मैंने बहुत मेहनत से पढ़ाई की। माँ को छोड़कर बड़े शहर आ गया। यूनिवर्सिटी की डिग्री ली। शादी की। अपना घर खरीदा। बच्चे हुए। और मैं सफल व्यक्ति बन गया। मुझे अपना नया जीवन इसलिए भी पसंद था क्योंकि यहाँ माँ से जुडी कोई भी याद नहीं थी। मेरी खुशियाँ दिन-ब-दिन बड़ी हो रही थी, तभी अचानक मैंने कुछ ऐसा देखा जिसकी कल्पना भी नहीं की थी। सामने मेरी माँ खड़ी थी, आज भी अपनी एक आँख के साथ। मुझे लगा मेरी पूरी दुनिया फिर से बिखर रही है। मैंने उनसे पूछा ‘‘आप कौन हो ? मैं आपको नहीं जानता। यहाँ आने कि हिम्मत कैसे हुई ? तुरंत मेरे घर से बाहर निकल जाओ। मेरी माँ ने जवाब दिया, ‘‘माफ करना, लगता है कि मैं गलत पते पर आ गयी हूँ।’’ वो चली गयी और मै यह सोचकर खुश हो गया कि उन्होंने मुझे पहचाना नहीं। एक दिन मैं किसी काम से अपने पुराने शहर गया तो मैंने सोचा चलो अपना पुराना घर को बेचना है उसे देख आऊ। फिर मन मे सोचा कि कहीं वहां मेरी माँ होगी लेकिन फिर सोचा नहीं वह सामान बेचकर अपना खर्चा चलाती है वहीं गई होगी चलो मैं चुपके से अपना घर देख आउं। मैं अपने पुराने घर गया तो देखा कि माँ जमीन पर मृत पड़ी थी। मेरे आँख से एक बूँद आंसू तक नहीं गिरा। उनके हाथ में एक कागज का टुकड़ा था ... उसमें लिखा था: मेरे बेटे ...... मुझे लगता है मैंने अपनी जिंदगी जी ली है। मैं अब तुम्हारे घर कभी नहीं आऊंगी .... पर क्या यह आशा करना कि तुम अपनी माँ से मिलने नहीं आते तो माँ की कभी कभी मिलने आना गलत है। मुझे तुम्हारी बहुत याद आती है। मुझे माफ करना कि मेरी एक आँख कि वजह से तुम्हें पूरी जिंदगी शर्मिन्दगी झेलनी पड़ी। जब तुम छोटे थे, तो एक दुर्घटना में तुम्हारी एक आँख चली गयी थी। एक माँ के रूप में मैं यह नहीं देख सकती थी कि तुम एक आँख के साथ अच्छे नहीं लग रहे हो और तुम्हारी आगे जिदंगी है, तुम्हें एक आँख का देखकर तुम्हारे मित्र तुम पर हँसेगे, इसीलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हें दे दी। मुझे इस बात का गर्व था कि मेरा बेटा मेरी उसी आँख से पूरी दुनिया नए आयाम से देख पा रहा है। मेरी तो पूरी दुनिया ही तुम थे मैं अपनी उस आँख से तुम्हारे साथ ही थी। चिट्ठी पढ़कर मेरी दुनिया बिखर गयी। और मैं उसके लिए पहली बार रोया जिसने अपनी जिंदगी मेरे नाम कर दी ..............मेरी माँ। - संग्रहक - टीपीएसजी Tags : again school embarrassed sidewalk shop small