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जयभीम के जनक बाबू हरदास

Siddharth Bagde
tpsg2011@gmail.com
Friday, April 12, 2019, 08:06 AM
Babu Hardas

जयभीम के जनक हरदास लक्ष्मणराव नगराळे उपाख्य बाबू हरदास इनका जन्म 6 जनवरी 1904 को नागपूर जिले के कामठी तहसील में हुआ। बाबू हरदास शुरू से ही डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के आंदोलन से जुडे हुए थे। इंग्लैड के गोलमेज परिषद जब गांधी ने अस्पृश्यों के नेता हम ही है। डॉ. आंबेडकर नही तो बाबू हरदास ने हजारों टेलीग्राम इंग्लंड भेजकर कहा की अस्पृश्यों के नेता गांधी नहीं डॉ. आंबेडकर है। ऐसा कहकर अंग्रेजों के मन में डॉ. आंबेडकर के प्रति सहानुभूती पैदा की। अकोला में जब स्वतंत्र मजदूर पक्ष की बैठक थी तब कामठी में उनके पुत्र का देहांत हुआ। तब उन्होंने कहा मेरा समाज दुःखी है और उनके दुःख दुर करने के लिए मैंने बैठक में हिस्सा लिया। मेरे पुत्र पर अंतिम संस्कार मेरा समाज करेंगा। यह बोलकर उन्होंने अपनी निष्ठा जाहीर की। नाग विदर्भ के महार समाज के लोग अपने उपजातीमें विभाजित होकर आपस में नफरत के नजर से देखते थे। गरीबी और दरिद्री की पीढ़ा के अंतर्गत रहने वाले महार समाज को इकठ्ठा करके उनमें बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों की बीज डालने का महत्त्वपूर्ण कार्य बाबू हरदास नगरकर इन्होंने बहुत की समर्पित भाव से किया। उपजातियों की दीवार तोड़ने के लिए बाबू हरदास इन्होंने नाम के पीछे का सरनेम की पूछ काटकर महार समाज में उपजातिविहन कृतीका नया आदर्श निर्माण किया। तब से उन्हे बाबू हरदास नाम से ही जाना जाता है। 
- संग्रहक - टीपीएसजी

 





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