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रामायण महाभारत सच्ची घटनाएं हैं या काल्पनिक कोरी कथाएं

Siddharth Bagde
tpsg2011@gmail.com
Wednesday, April 17, 2019, 04:42 PM
Kalpnik

रामायण महाभारत सच्ची घटनाएं हैं या काल्पनिक कोरी कथाएं
सतयुग 17,28,000 वर्ष पूर्व
त्रेता युग 12,96,000 वर्ष पूर्व
द्वापर युग 8,64,000 वर्ष पूर्व
कलयुग 4,32,000 वर्ष पूर्व
पृथ्वी की उत्पति 4 अरब 54 करोड़ वर्ष पूर्व मानी जाती है और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति 65 करोड़ साल पहले मानी जाती है। लेकिन जीवाश्म के आधार पर जीवों की उत्पत्ति 25 से 3000000 वर्ष पूर्व वर्तमान दृष्टिकोण से 50 से 6000000 वर्ष पूर्व। वर्तमान साक्ष्यों और परिपेक्ष के आधार पर डीएनए रिपोर्ट के अनुसार होमो सेपियंस आधुनिक मानव की उत्पत्ति 200000 वर्ष पूर्व मानी जाती है। लेकिन विश्व की कोई भी सभ्यताओं का विकास 9 से 10000 साल पुराना नहीं है।
रामायण काल त्रेता युग में माना जाता है और त्रेता युग का अंत राम के देहांत से होता है। शास्त्रों के अनुसार राम विष्णु के दसवे में से सातवे अवतार थे और इसी युग में परशुराम विष्णु के अवतार थे यह कैसे संभव है। एक व्यक्ति एक समय में दो रूप कैसे धारण कर सकता है। 
महाभारत काल की गणना द्वापर युग में मानी जाती है और इस काल का अंत कृष्ण के देहांत के बाद ही होता है। 
यहां यह उल्लेखनीय है कि अवतार का अर्थ होता है अवतरित होना अर्थात प्रकट होना जैसे शास्त्रों में दिया हुआ है कि दीवारों से चट्टानों से दरवाजों से मीनारों से पत्थरों से पानी से आग से प्रकट होना अवतार लेना यह जब उस काल में संभव था तो इस काल में क्यों संभव नहीं है।
क्या कोई एक व्यक्ति एक युग से दूसरे युग में पहुंच सकता है। इन युगों के आधार पर द्वापर युग और कलियुग के बीच में 432000 वर्ष का अंतर है। एक व्यक्ति का इतने वर्षों तक जीवित रहने की कल्पना नहीं की जा सकती है जबकि रामायण के कुछ पांच किरदार रामायण और महाभारत दोनों में देखे जाते हैं।’
रामायण के अनेक रचयिता है। जानकारी के अनुसार रामायण वाल्मीकि ने लिखी थी और वह इसलिए लिखी थी कि वाल्मीकि भंगी समाज का प्रतिनिधित्व करते थे और उस समय राम के सबसे घोर विरोधी भंगी समाज के लोग थे इसलिए ब्राह्मणों ने यह साजिश रची है कि भंगी समाज को अपना गुलाम कैसे बनाया जा सके इसलिए ग्रंथों को इस तरह से प्रस्तुत किया कि रामायण वाल्मीकि ने लिखी। 
आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत की रचना 3137 वर्ष पूर्व हुई मतलब आज के 5155 वर्ष पूर्व। नई शोध के अनुसार 7323 संपूर्ण रामायण काल बताया जाता है अर्थात आज से 9341 वर्ष पूर्व जबकि मिस्र सभ्यता के अनुसार राम का जन्म 5114 वर्ष पूर्व बताया जाता है। जबकि भारत में लिपि का आविष्कार 400 से 500 वर्ष पूर्व हुआ। महाभारत या रामायण काल से अभी तक लिपि के आविष्कार तक कौन ऐसा व्यक्ति हो गया जो उसको लिखने के लिए जीवित बचा होगा। 0 का आविष्कार आर्यभट्ट ने 498 वर्ष पूर्व किया। जब रामायण और महाभारत की रचना पहले ही की जा चुकी है और शून्य का आविष्कार 498 ईसा पूर्व हुआ ऐसी स्थिति में 100 कोरव और रावण के 10 सिर को और उनकी गिनती करना उचित कैसे प्रतीत होता है।
सभी सभ्यताओं में सबसे पहले लिपियों का आविष्कार हुआ। खरोष्ठी लिपि, देवनागरी लिपि, ब्रह्म लिपि, उसके बाद 500 ईस्वी पूर्व पाली और प्राकृत भाषाओं का अाविष्कार हुआ। जब लिपि का आविष्कार इतने वर्षों बाद में उसके पहले रामायण और महाभारत ग्रंथों की रचना कैसे संभव है।
दरअसल ब्राह्मणों ने आज के परिपेक्ष में साक्ष्यों और स्थानों को आधार मानते हुए ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य को अपना गुलाम बनाने के लिए रामायण और महाभारत काल की रचना की वरना एक पात्र रामायण और महाभारत में होना संभव नहीं है। 
क्या पत्थर कभी पानी में तैर सकते हैं। जब हनुमान उड़ सकते हैं तो भारत से श्रीलंका जाने के लिए वानरों के द्वारा पुल बनाने की क्या आवश्यकता है। ज्ञात हो कि दशहरा से दीपावली के बीच 15 दिन का अंतराल है दशहरे के दिन रावण का वध हुआ था और दीपावली के दिन अयोध्या में राम का आगमन हुआ था। श्रीलंका से भारत के बीच की दूरी 3305 किलोमीटर है। अभी इसमें श्रीलंका से अंदर भाग की दूरी जहां रावण का महल था उसको नहीं जोड़ा गया है फिर भी क्या एक व्यक्ति इस आधार पर 15 दिनों में 220 किलोमीटर प्रतिदिन चल सकता है यदि वह 220 किलोमीटर प्रति दिन चलेगा तभी श्रीलंका से अयोध्या तक पहुंच पाएगा क्या यह संभव है। एक तथ्य यह भी है कि जब जाते समय विमान से गए थे तो आते समय पैदल आने की क्या आवश्यकता है।
रामायण और महाभारत के पांच किरदार ऐसे हैं जो दोनों युगों में पाए जाते हैं जो कि बिल्कुल भी संभव नहीं है महाभारत में श्री कृष्ण और जामवंत का युद्ध हुआ था जामवंत ने अपनी पुत्री का विवाह श्री कृष्ण से कर दिया था। रामायण में हनुमान अपनी शक्ति भूल जाते हैं तो जामवंत याद दिलाते हैं। महिषासुर भी एक अद्भुत किरदार है जो रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता का नाम है जिसने युधिष्ठिर के सभा भवन का निर्माण किया था तथा प्रकांड ज्योतिषी भी था और वास्तुशिल्पी भी था। परशुराम भी एक अद्भुत किरदार है जो रामायण और महाभारत दोनों में देखे जाते हैं परशुराम विष्णु के भी अवतार हैं जो रामायण में थे और महाभारत में भी रहे परशुराम ने रामायण काल में कई बार क्षत्रिय वंश को नष्ट किया जो भगवान विष्णु के अवतार भी रहे हैं। वहीं महाभारत काल में भीष्म द्रोणाचार्य और कर्ण के गुरु भी परशुराम थे। एक कलाकार और हैं जिन्हें हम हनुमान के नाम से जानते हैं जो रामायण में भी थे और महाभारत में भी थे जब भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो जाता है सब हनुमान प्रकट होते हैं और भीम को उसकी शक्ति का एहसास कराते हैं। यह सभी तथ्य कदापि उचित नहीं प्रतीत होते हैं।
विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार महाभारत का रचनाकाल 31 सौ से 12 ईसवी पूर्व जबकि इसको लिखा गया है 12 साल से 600 ईसवी पूर्व रामायण की रचना के रचनाकार घटित हुआ उसका काल अलग.अलग है।
इशा संवत के अनुसार 3585 वर्ष पूर्व 
प्राचीन संवत के अनुसार 4172 वर्ष पूर्व 
कलियुग संवत के अनुसार 5117 वर्ष पूर्व 
इब्रानी संवत के अनुसार 6029 वर्ष पूर्व 
इजिप्टियन संवत के अनुसार 28669 वर्ष पूर्व 
फिनिशियान के अनुसार 30087 वर्ष पूर्व
ईरानियन मत के अनुसार 189995 वर्ष पूर्व
चल्डियान अनुसार 21500087 वर्ष पूर्व 
खताई धर्म अनुसार 8,88,40,388 वर्ष पूर्व
चीनी धर्म ग्रंथों के अनुसार 96002516 वर्ष पूर्व
वैवस्तू मनु के अनुसार 12 करोड़ 05,33,117 वर्ष पूर्व
1 अरब, 96 करोड़ 08 लाख 53 हजार वर्ष पूर्व
पुराणों के अनुसार 30 करोड़ 6720000 वर्ष पूर्व
जबकि इसी संबंध में यूरोप के वैज्ञानिक यह बताते हैं कि रामायण की रचना और मानव सभ्यता का विकास 9000 साल पहले से अधिक नहीं है।
निष्कर्ष: यहां ध्यान देने वाली यह बात है इस पूरे प्रस्तुतीकरण का यह अर्थ है कि एक तो इतना लंबा मनुष्य काल नहीं होता है जिसे यहां लिखने के लिए कौन खाली बैठा है जिस समय की लिपि का आविष्कार नहीं हुआ था, लिपि के बाद भाषा का आविष्कार भी, दूसरी बात यह भी उजागर होती है कि पहले पृथ्वी की उत्पत्ति होना आवश्यक है। उसके बाद जीवों की उत्पत्ति, यदि जीव उत्पन्न हुए है तो उसके बाद मनुष्य की उत्पत्ति का सवाल पैदा होता है। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए एक बार फिर से पढ़िए, जिससे आपकी शंका का समाधान हो सके जैसे महाभारत और रामायण का रचनाकाल  पृथ्वी की उत्पत्ति मनुष्य की उत्पत्ति, लिपि का आविष्कार भाषा का आविष्कार जीवों की उत्पत्ति, इस कालखंड को आप क्रम से जमाते जाएंगे और वैज्ञानिक तथ्यों को भी साथ में रखेंगे तो आपको एक झूठ का पुलिंदा ही नजर आएगा।
- मोहनलाल मूलनिवासी





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