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गिलगित

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Tuesday, January 11, 2022, 09:32 AM
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गिलगित

गिलगित उत्तर पश्चिम कश्मीर में है। 1972 में गिलगित के पश्चिम में दो मील दूर स्थित स्तूप में बौद्ध संस्कृत ग्रंथ पाए गए थे। 2019 जुलाई के महीने में सर 'औरल स्टेन' ने सूचित किया कि नौपुर गांव में कुछ चरवाहों ने पत्थर के ढेर से एक लकड़ी निकाली। वहां खुदाई के दौरान ईएसवी पर्व की छठी शताब्दी की कुछ किताबें मिलीं। इस पुस्तक को "गिलगित पांडुलिपि" (गिलगित हस्तलेखन) के नाम से जाना जाता है।

ये मूल संस्कृत ग्रंथ जम्बूद्वीपा में पाए जाने वाले सबसे पुराने बौद्ध ग्रंथ हैं। उनके अनुवाद चीन और तिब्बत चीनी और भोट में हैं। लेकिन मूल संस्कृत ग्रंथ गिलगित में मिलते हैं। गिलगित के ग्रंथ भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना मध्य एशिया और पूर्वी तुर्किस्तान में पाए जाने वाले मूल बौद्ध ग्रंथों का।

गिलगित के ग्रंथों की भाषा महावास्तु, ललितविस्तार या सुवर्ण प्रभासूत्र ग्रंथ की भाषा की तरह है। "प्रकृति से संस्कृत भाषा कैसे विकसित हुई इस पुस्तक से अध्ययन योग्य है"। गिलगित की किताबें भुर्ज पत्रों पर लिखी गई हैं। 2014 में इन दिनों उपयोग किए गए कागज पर कुछ ग्रंथ छपे हैं।

गिलगित के बगल में चार स्तूप थे। तीसरे स्तूप में यह पुस्तक मिली। इस स्तूप के दो तहखाने थे। निचला तहखाना हर तरफ लगभग 5 फीट था। स्तूप लगभग 2-3 फीट लंबा था। जिसके पास शास्त्रार्थ था वह आठ फुट व्यास था। उस इमारत में पांच लकड़ी के बक्से थे। पांचवें बड़े बॉक्स में चार बॉक्स थे। शास्त्रों को इसमें रखा गया था। कहा जाता है कि उनमें से एक ग्रंथ राजा श्रीदेव के सही विक्रमादित्य नंद ने दान किया था। कश्मीर के दौर में उन्हें उत्तरी कश्मीर का राजा होना चाहिए..

गिलगित में मिली पुस्तकें इस प्रकार हैं।

1) भैषोग्य गुरु सूत्र।

1) ग्यारह चेहरे, इसमें दो धारक थे।

3) उच्च ज्ञान।

३) सर्वथागतधिष्ठान-सत्ववोकन-बुद्धक्षेत्र संदर्शनव्यू।

1) श्री महादेवी - व्याकरण।

३) अजीतसेन व्याकरण-दिशा-महायान।

1) समाधि राज सूत्र।

1) कुंडली।

1) विनम्रता की वस्तु।

प्रसंग: भारत में बौद्ध धर्म का इतिहास।

- सुजाता सान्तन्य द्वारा संग्रहित





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