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रोमन बुद्धा एपिक्टेटस

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Monday, January 10, 2022, 06:36 PM
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रोमन बुद्धा एपिक्टेटस|

रोमन विद्वान एपिक्टेटस का जन्म इसा पुर्व 50 में ग्रीक देश के एक गुलाम परिवार में हुआ था| रोम सम्राट नेरो के सेक्रेटरी एपाफ्रोडिटोस के महल में एपिक्टेटस गुलामी करतें थे| उस समय भारत की तरह ग्रीक भी एक उच्चशिक्षित देश था और वहाँ पर बौद्ध धर्म के प्रभाव में स्टोईक तत्वज्ञान (Stoic philosophy) विकसित हो चुका था| एपिक्टेटस की बुद्धिमत्ता देखकर एपाफ्रोडिटोस प्रभावित हो चुका था और उसने एपिक्टेटस को अपनी गुलामी से मुक्त कर उस समय के प्रसिद्ध स्टोईक विद्वान मुसोनियस रुफुस के पास भेजा था| एपिक्टेटस की विद्वता देखकर सम्राट निरो ने उन्हें अपना राजनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था| सन 68 में सम्राट निरो की मृत्यु के बाद एपिक्टेटस संपुर्ण ग्रीक में अपना तत्वज्ञान प्रचलित करने लगे थे|

एपिक्टेटस के प्रसिद्ध शिष्यों में से 'अरियन' (Arrian) अत्यंत विद्वान थे| एपिक्टेटस की शिक्षाओं को अरियन ने सन 108 में "डिस्कोर्सेस" (Discourses) नामक एक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा था, जो आज भी उपलब्ध है| सन 135 में एपिक्टेटस का परिनिर्वाण हुआ था|

तथागत बुद्ध के "अत: दिप भव" इस सिद्धांत पर आधारित एपिक्टेटस ने आत्मज्ञान (Philosophy of Self-Knowledge) यह तत्वज्ञान विकसित किया था| (Epictetus, Discourses, II. 11.1) तथागत बुद्ध के कलाम सुत्त पर आधारित एपिक्टेटस ने "कल्याणकारी तर्कवाद" (Prolepsis) विकसित किया था| ग्रीक बुद्धा पायरो की तरह एपिक्टेटस ने भी बुद्ध के इंद्रियनिग्रह तत्व को Apathia और समाधि तत्व को Ataraxia के रूप में विकसित कर दिया था| (Epictetus, Discourses, II. 18.19-31)

तथागत बुद्ध के मेत्ता और करुणा (Peity and Compassion) तत्व पर आधारित एपिक्टेटस ने "वैश्विक बंधुत्व (Universal harmony)" तत्व विकसित किया था| (The history of ancient philosophy, Heinrich Ritter, Alexander James william Morrison, 1846, vol. IV, p. 218)

एपिक्टेटस और अन्य स्टोईक विद्वानों ने ही तथागत बुद्ध से प्रभावित होकर "वैश्विक बंधुत्व अर्थात वसुधैव कुटुंबकम" (Cosmopolitanism)" यह तत्व विकसित कर दिया था| यह सत्य इतिहास बहुजनों को पता न होने के कारण ब्राह्मण लोग यह बताते रहते हैं की वसुधैव कुटुंबकम उनकी संकल्पना है| वास्तव में यह एक बौद्ध संकल्पना है, जो बुद्ध के मेत्ता और करुणा तत्व पर आधारित है|

एपिक्टेटस जैसे महान विद्वान ने प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद बुद्ध के तत्वज्ञान को विश्व में स्थापित किया था, इसलिए हम उनके ऋणी है और उनके इस महान कार्य के लिए हम उनका कोटि कोटि प्रणाम करतें हैं|

बुद्ध का ज्ञान पश्चिमी देशों में प्रस्थापित करनेवाले एपिक्टेटस सचमुच रोमन साम्राज्य के "रोमन बुद्धा (Roman Buddha)" ही है|

-- डा. प्रताप चाटसे, बुद्धिस्ट इंटरनेशनल नेटवर्क





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