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राम के जन्म का वर्ष और उसके शासनकाल का वर्ष

TPSG

Wednesday, December 30, 2020, 08:01 PM
Ram

जीतिए 2 करोड़ का इनाम..‼️

‼️खुला  चेलेंज..‼️

आपको केवल राम के जन्म का वर्ष और उसके शासनकाल का वर्ष बताना हैं ।

पूरा लेख पढ़े... साक्ष्यों सहित उत्तर दें और पाएं कमेंटेटर प्रेम कुंमार की 2 करोड़ की चल अचल संपत्ति , उनका कहना है कि क्योंकि मेरे पास ज्यादा पैसे नही है इसलिए संपूर्ण चल अचल संपत्ति को दांव पर लगा रहा हूँ । 

उत्तर देते समय इसी पोस्ट की क्रम संख्या 1 से 7 तक पढ़ लें तब उत्तर दे ।दुनिया के सारे शीर्ष बुद्धजीवी धर्म गुरु,, देश के सभी प्रोफेसर पुरातत्वविद,आईएएस,पीसीएस,निचली अदालत से लेकर शीर्ष अदालत हाई कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट के जज तक सभी मेरी जिज्ञासा शांत करे। 

क्यों उठाया मैंने ऐसा कदम?? मेरे प्यारे देश वासियों....मै 1991 से 1996 तक इलाहाबाद केंद्रीय विश्व विद्यालय का छात्र रहा। इतिहास,भूगोल,धर्म ,दर्शन,राजनीती, इन सभी विषय में बहुत ही स्ट्रांग मैं था पुरे देश में जहा जाता था लोगो को सारा इतिहास ,भूगोल, खेल की सारी जानकारी देता था 

पूरी दुनिया के सभी धर्म में धर्म ग्रंथ ,तौरेत,बाइबल ,इंजील ,कुरान,हदीश,अवेशता, त्रिपिटक सारे हिन्दू धर्म शास्त्र ,हिन्दू , मुस्लिम सिख,ईसाई ,बौद्ध ,पारसी जैन, ताओ शिंतो, कन्फ्यूसियस सब के विचार और दर्शन पढ़े हैं।  

अभी इसी लॉक डाउन में मेरी पत्नी ने पूछ लिया की गूगल बाबा आप  भगवान राम के जन्म तिथि वर्ष और शासन काल बता दो तब जाने असली गूगल मैन हो पिछले 2 महीने से मैंने अपनी लाइब्रेरी की सारी किताब पढ़ी कंही हमें ये उत्तर नहीं मिला मैंने अपनी पत्नी को कह दिया जिसका उत्तर हम नहीं बता पाएंगे उसका उत्तर पुरे भारत के लोग नही बता पाएंगे। इसी शर्त पर मै अपनी सारी चल अचल संपत्ति दांव पर लगा दिया हूँ 

#शपथ_पत्र....!!!

मेरे द्वारा दी गयी क्रम संख्या 1 से क्रम संख्या 7 (सात ) तक  की कोई भी इतिहास और उसके वर्ष गलत हो   तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार,माननीय हाई कोर्ट इलाहबाद,माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली मेरी सारी चल अचल संपत्ति कुर्क कर ले और मुझे झूठी जानकारी देने के कारण मृत्यु दंड दे दे..!!

क्रम संख्या 1:- आज से 5 हजार साल  से भी पहले अगर किसी ने भगवान राम का  जन्म दिन बताता है तो वो गलत उत्तर होगा क्योंकि 5 हजार साल पहले दुनिया में न कोई जाति थी न धर्म और रामायण के पात्र वर्ण व्यवस्था पर आधारित है जीवो के क्रमिक विकास से लेकर मानव विकास चाहे वह पूरा पाषाणकाल, मध्य पाषाणकाल,नव पाषाणकाल,,ताम्र पाषाण काल या कांस्य युगीन नदी घाटी सभ्यता किसी काल में वर्ण और धर्म आधारित लोग नही थे ये वहां की भौगोलिक क्षेत्र और शरीर की बनावट के आधार पर पहचाने जाते थे.... जैसे नेग्रीटो,प्रोटो आसट्रलॉयड,मंगोलियन,नार्डिक,मेडीटरेनियन।

क्रम संख्या 2:- ईसा पूर्व 2000 से ईसा पूर्व 1500 के बीच आर्य यूरेशिया से भारत में आये चूंकि  रामायण में इन्ही आर्य जातियों का वर्णन है  केवल आने का इतिहास मिलता है कोई बड़े राजतन्त्र का भारत में नहीं था ।

क्रम संख्या 3:- भारत में ईसा पूर्व 1200 यानी आज से 3200 साल पहले भारत के किसी भी व्यक्ति को लोहे धातु  की जानकारी नही थी, 1200 ईसापूर्व भारत में लोहे की प्राचीनता बताई गई है, क्योंकि जनक के हल का फाल और परशुराम की कुल्हाड़ी और जो रथ के धुरे और अस्त्र शस्त्र भी।कुछ लोहे के रहे होंगे इसलिए 3200 साल पहले भी रामायण के राम का शासन काल नहीं आता है ।

 क्रम संख्या 5 :भारत में आर्यो के आगमन के बाद 1500 ईसापूर्व से 1000 ईसापूर्व तक ऋग्वेदिक काल  या ऋग्वेद के रचना का काल है ऋग्वेद के दसम मंडल जो सबसे आखिरी में लिखे गए उसी में पहली बार वर्ण व्यवस्था की चर्चा हुई है ये द ईसापूर्व 1000 में लिखे गए इसलिये 3000 साल पहले भी राम का शासन काल नहीं रहा क्योकि तब तक वर्ण व्यवस्था नहीं थी ।

 क्रमांक 6:- भारत में छठी शताब्दी ईसापूर्व  से पहले कोई बड़े गणराज्य या राजतन्त्र भारत के इतिहास में नहीं था  ठीक से  दर्शाए गए बड़े राज तंत्र यही से शुरू होते है इसलिए 2600 साल पहले भी राम का शासन काल नही था क्योंकि रामायण में राम बड़े प्रतापी और बड़े राज घराने  के बताये गए है ।  

क्रम संख्या 7:-  बहुत ही महत्व पूर्ण इतिहासकारो, पुरातत्वविदो ने महाकाव्यों का काल यानी रामायण का रचनाकाल 400 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी तक माना है और सबसे बड़ी बात राम के समकालीन ऋषि और कवि वाल्मीकि जी रहे इन्ही रामायण धर्म ग्रंथ के अनुसार माता सीता राम द्वारा परित्याग के बाद वाल्मीकि जी के आश्रम में रही है।  और रामायण में भी बुद्ध और  बुद्ध धर्मावलंबियों को वाल्मीकि जी ने चोर कहा है । 

बुद्ध का जीवन काल 563 ईसापूर्व से 483 ईसापूर्व तक रहा यानी  इतिहासकारो ने जो रामायण का रचनाकाल 400 ईसापूर्व से 200 ईस्वी तक बतायी ,वह सत्य है ।अगर किसी को  न विश्वास हो तो  वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड सर्ग 109 श्लोक 34 देखे ,यही से सब कुछ पता चल जायेगा.....

यथा हि चोरः स तथा हि बुद्ध स् तथागतं नास्तिक मत्र बृद्धि।  

तस्माध्धि यःशक्य तमः प्रजानां ये नास्ति के नाभिमुखो बुद्ध स्यात।  

अर्थ:-जैसे चोर दंडनीय होता है वैसे बुद्ध और बौद्ध मत वाले भी दंडनीय होते है अतः प्रजा पर अनुग्रह करने के लिए जिस नास्तिक पर दंड दिलाया जाय उसे चोर के समान दंड दिलाया जाय और जो वश के बाहर हो उस नास्तिक के प्रति ब्राह्मण कभी उन्मुख न हो उससे वार्ता लाप तक न करे।

वाल्मीकि जी के द्वारा बुद्ध और बौद्ध धर्मालंबियों को चोर और नास्तिक कहना  इससे ये सिद्ध हो गया कि वाल्मीकि रामायण बुद्ध के बाद लिखी गयी और भारत के पुरातत्वविदो और इतिहासकारो ने रामायण के रचनाकाल का जो समय है 400 ईसापूर्व  से 200 ईस्वी तक   दिया है वो सत्य है।

चूकी वाल्मीकि जी राम के समकालीन थे माता सीता उनके आश्रम  में रही है तो इसी के बीच का इतिहास टटोलते है।

मैंने पिछले 2 महीने से पूरा इतिहास का अध्ययन फिर से किया और 400 ईसापूर्व से 200 ईस्वी तक के  सभी का शासन काल पढ़ा हर्यक वंश ,नन्द वंश,मौर्य  ,शक पह्लव कुषाण  वंश मैंने पिछले 2 महीने से 400 ईसापूर्व से 200 ईस्वी तक के सभी राजवंशो को पढ़ा जिसमे एक राजवंश ऐसा रहा जिसमे रामायण की कुछ घटना  उस राज राज वंश से मिला उस राजनष का नाम शुंग वंश था जिसके राजा पुष्यमित्र शुंग ने भी  अश्वमेघ यज्ञ किया  था, रामायण में भी अश्वमेघ यज्ञ का वर्णन है।  

अभी कुछ दिन पहले  हमारी लाइब्रेरी में एक किताब मिली   वो किताब का नाम था वोल्गा से गंगा, जिसके लेखक महापंडित राहुल सांकृत्यायन है उसके 11 वे पाठ प्रभा में  (पेज 161 व 162 में पुष्य मित्रशुंग को ही राम बताया गया है।   

  आइये उसमे जो लिखा है उसे बताते है साकेत (अयोध्या) किसी राजा  की प्रधान राजधानी नहीं थी ,मौर्य वंश  सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने पहले पहल साकेत (अयोध्या) को राजधानी  का पद प्रदान किया ।

वाल्मीकि ने भी अयोध्या नाम  का प्रचार किया जब अपनी रामायण को पुष्यमित्र व शुंग वंश के शासन काल में लिखा इसमें कोई शक नहीं अश्वघोष ने वाल्मीकि के मधुर काव्य ग्रन्थ रसास्वादन किया था।

    कोई ताज्जुब नहीं  की वाल्मीकि शुंग वंश के आश्रित कवि रहे हो जैसे कालिदास, कालिदास चंद्र गुप्त विक्रमादित्य के और शुंग वंश  की राजधानी की महिमा बढ़ाने के लिए जातकों के दशरथ की राजधानी वाराणसी से साकेत (अयोध्या) कर दी। और राम के रूप में शुंग सम्राट पुष्य मित्र या अग्नि मित्र की प्रशंसा की,  वैसे ही जैसे कालिदास ने रघुवंश के रघु और कुमार संभव के कुमार के नाम से पितापुत्र चंद्र गुप्त विक्रमादित्य और कुमार गुप्त की की।

    अब तो मैं भी ये पक्का मान चुका हूं  कि पुष्य मित्र शुंग ही  वाल्मीकि के काव्य ग्रन्थ रामायण के राम हैं देश में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अब तक पुष्य मित्र शुंग को ही राम माना है क्योंकि मैंने अपने 150 व्हाट्सएप ग्रुपों में राम को जानने की कोशिश की तो 70% के पढ़े लिखे युवाओं ने पुष्य मित्र को ही राम बताया ।

चूँकि 184 ईसापूर्व में  मौर्य वंश सम्राट बृहद्रथ मौर्य की हत्या करके पुष्यमित्र राजा बने थे  बृहद्रथ बौद्ध धर्मावलंबी था यही कारण है कि वाल्मीकि ने अपने काव्य ग्रन्थ में बौद्धों को चोर और नास्तिक कहा। 

पुष्य मित्र ने भारत में फ़ैल रहे तेजी से बौद्ध धर्म के प्रसार को रोका और फिर से ब्राह्मण धर्म ( सनातन धर्म) की स्थापना की, अब तक मेरी नजर में पुष्य मित्र शुंग ही राम है।   

मेरी पत्नी  को अभी भी शंका है।  तो आप लोग 2 करोड़ की हमारी चल अचल संपत्ति ले जाए और  भगवान राम का जन्म वर्ष और शासन काल बताये।

    Note:-  अयोध्या मामले पर जो माननीय सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय आया है वो भगवान राम थे या नहीं इस पर निर्णय नहीं हुआ हैं । वहां राम मंदिर था अथवा नहीं,इस पर  निर्णय हुआ है ।  

हमारा पता:-कमेंटेटर प्रेम कुमार , स्वामी विवेकानंद सोसाइटी ट्रस्ट आश्रम मदारियापुर ,भद्री कुंडा प्रताप गढ़।    





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