रजत जाति के धोबी लोग बुद्धिष्ट (प्राचीन बौद्धिष्ट) TPSG Sunday, May 19, 2019, 08:02 AM रजत जाति के धोबी लोग बुद्धिष्ट (प्राचीन बौद्धिष्ट) बिहार के #रजक जाति के लोग (धोबी लोग) #प्राचीन #बौध्द है। बिहार में धोबी जाति शेड्यूल्ड कास्ट से है। महाराष्ट्र में वह ओबीसी है। ब्राम्हणो ने किसी भी जाति को राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान नही दी है।2007 में जब मैं पहली बार बिहार गया था तब बिहार के रजक शब्द का अर्थ पूछा तब लोग इतने ही कहते थे कि हम धोबी है और गाडगेबाबा ,डॉ बाबासाहेब आंबेडकर हमारे महापुरुष है। रजक शब्द का अर्थ कई वर्षों से ढूंढ रहा था।आज रजक शब्द का अर्थ का राज खुल गया। सम्राट अशोक के एक शिलालेख से रजक शब्द का राज खुल गया। देहली के शिलालेख में सम्राट अशोक कहते है कि लजुका में बहुसू पानसतसहसेसु जनसी आयता। मेरे #रज्जुक कई लाख प्राणियों में, जनों में नियुक्त है। डिक्शनरी में रजक शब्द का अर्थ प्रिंस या राजा का पुत्र ऐसा दिया है। मूलतः रज्जुक से ही रजक शब्द बना है यह मेरा अनुमान है। सम्राट अशोक ने रज्जुक यह खास पद नियुक्त करके पूरे भारत मे समानतावादी व्यवस्था का निर्माण किया था। विदेशी ब्राम्हणो ने मूलतः बौद्ध लोगो को अछूत घोषित किया।धोबी जाति को भी ब्राम्हण अछूत ही कहता है,मानता है। रज्जुक लोग ही वर्तमान में रजक है। संत गाडगे बाबा और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने मौर्य,बुद्ध की विरासत को आगे बढ़ाया।रजक लोगो की जिम्मेदारी है कि वे संविधान की व्यवस्था को आगे चलाये और बुद्ध मौर्य की विरासत को बढ़ाये। कल बताऊंगा कि सम्राट अशोक शाक्य किसे मानते थे। आज एक जाति विशेष का शाक्य शब्द बना हुआ है मगर उसकी व्यापकता बहुत बडी थी। कल इसका खुलासा करूंगा। रजक लोगो ने भी 18 मई के बुद्धिस्ट इंटरनैशनल नेटवर्क के विशाल सम्मेलन को जाहिर सपोर्ट दिया।यादव, कोयरी,कुर्मी लोगो ने भी इस प्रोग्राम में बढ़चढ़कर हिस्सेदारी की है। प्रो.विलास खरात। डायरेक्टर, डॉ बाबासाहेब आंबेडकर रिसर्च सेंटर,नई दिल्ली। Tags : people beings rectangular Delhi Emperor inscription