मंदिर में हिस्सा भिखारी का Siddharth Bagde tpsg2011@gmail.com Monday, April 22, 2019, 09:59 PM मंदिर में हिस्सा भिखारी का मंदिर में पूजा करने वाला पूजारी होता है, और बाहर भीख मांगने वाला भिखारी होता है। पूजा करने वाले को पूजारी कहाँ जाता है, और भीख मांगने वाले को भिखारी कहाँ जाता है। ईश्वर, भगवान, परमेश्वर की यदि बात करें तो वह कहाँ है, कौन सी जगह पर रहता है, क्या करता है, क्यों करता है, किसके लिये करता है, क्या चाहता है, क्यों कर रहा है और ना जाने कितने सवालों के जवाब कोई भी नहीं दे सकता है, अगर सवालों के जवाब देता भी है तो अपने अपने हिसाब से अपने मन के स्तर से जवाब दिया जाता है, उन सवालों के जवाब में कोई सबूत पेश नहीं किया जाता है। लेकिन एक विद्वान, समझदार, शिक्षित व्यक्ति से पूछेगें कि ईश्वर कहाँ रहता है तो वह जवाब देगा - मंदिर में रहता है। वह क्या करता है तो कहेगा कि कुछ नहीं करता है, जहां के तहाँ ही रहता है। पूजा करने वाला ऐसा व्यक्ति जिसे भगवान को खुश करने, उन्हें मनाने और दूसरो की प्रार्थना ईश्वर तक पहूंचाने का मंत्र आता हो, उसमें वह दीक्षित हो वहीं व्यक्ति को मंदिर में पूजा करने का अधिकार है। लेकिन वहीं पंडित व्यक्ति कहता है कि यदि कोई मुसीबत आये तो ईश्वर को मन से याद करों वह मुसीबत दूर कर देगा, आपकी मदद जरूर करेगा और यहीं बात वैदिक, दैविक ग्रंथो में भी मिलती है। यदि ऐसा है तो पूजारी मंदिर में क्यों बैठा है, क्या कोई लालच है ? मंदिर में गरीब, अमीर दोनों ही प्रसाद भगवान को चढ़ाने आते है, भगवान सबका है तो भोग चढ़ने, प्रसाद चढ़ने, रूपया-पैसा, सोना-चांदी, हीरे-मोती, चढ़ने में और पाने में भी सबका अधिकार है, यह कठोर सत्य है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी पिता के दो संतान है और पिता ने 1000/- (एक हजार) रूपये की जायदाद छोड़कर चले गये तो उनकी जायदाद में दोनों का हिस्सा बराबर होता है। यदि वह पिता एक दूकान जिसमें व्यापार होता है वह दूकान छोड़कर चले गये तो व्यापार में हिस्सा बराबर होता है। हम और पंडित एक ही ईश्वर की संतान हैं, जो हमें धरती पर छोड़ गये है, मंदिर उनकी जायदाद हैं, हम सब उनकी संतान है तो हर मंदिर में चढ़ने वाला चढ़ावे पर अधिकार भी सबका है ऐसा होना वाजिब ही है। किन्तु यह हिस्सा पूजारी सबको देने को तैयार नहीं है, किन्तु जिसे आवश्यकता है, उसे तो देना होगा। मंदिर किसी एक इंसान की जागिर नहीं है। हम मंदिर में पूजा करने वाले पूजारी की बात करें तो वह पंडित के रूप में भगवान के सामने हाथ जोड़कर, हाथ फैलाकर कुछ तो मांगता है। बाहर फटे हाल में भूख से परेशान, कमजोरी से लाचार, गरीबी से तंगहाल भिखारी किसी न किसी से कुछ मांग करता है, कोई व्यक्ति उसे कुछ देता है तो कोई नहीं भी देता है। क्या पंडित भगवान का पूजारी है और बाहर बैठा भगवान का जाप करने वाला इंसान भिखारी है, वह भी तो हर बार भगवान-भगवान पुकारता है, वह भी किसी न किसी रूप में भगवान को पूजता है। वह मंदिर के बाहर पूरे समय दयनीय स्थिति में पड़ा रहता हैं, क्या उसका हिस्सा मंदिर के चढ़ावे में कुछ भी नहीं है। पंडित भी इंसान है, बाहर बैठा भिखारी भी इंसान है, दोनों भगवान को मानते है, दोनो ही ईश्वर की संतान है, तो पिता के जायदाद में बराबर का हिस्सा होना चाहिये। क्यों रहेगा भिखारी गरीब ? इसलिये की वह कोई काम नहीं करता है, वह बाहर बैठा रहता है और पंडित मंदिर के अंदर बैठा रहता है, वह कौन सा काम करता है ? बाहर बैठा भिखारी धूप में रहेगें। गर्मी में तपता रहे - पकता रहें, बरसात में भीगता रहे, सुखता रहे और फिर गिला होता रहे, ठंड में ओढ़ने को कुछ हो या न हो बेतहाशा ठिठुरता रहे, क्यों ! कुछ मिल जाने की खातिर! वही स्थिति पंडित की है, गर्मी के मौसम में, बरसात के मौसम में, ठंड के मौसम में मंदिर छोड़कर नही जाते क्योंकि कोई भक्त भगवान को भोग चढ़ाने, चढ़ावा चढ़ाने आ जायेगा। इस चढ़ावे का असली हकदार तो बाहर बैठा भिखारी है, क्योंकि उसकी आवश्यकतायें है, वह गरीब है, वह भूखा है, उसके पास रहने को मकान नहीं है। भिखारी का हिस्सा पूरा बनता है क्योंकि ईश्वर दुःखी इंसान की मदद करता है तो दुःखी कौन है पंडित या भिखारी। भिखारी क्यों दर-दर भीख मांगता है, मंदिर में उसका हिस्सा है, उसे अपने हिस्से को लेना होगा, वह इस हिस्से से अपने लिये सुख खरीद सकता है, अपने बच्चों को पढ़ा सकता है, उसे भिख मंगा बनाने से अच्छा है, कि व्यापार करने या नौकरी करने लायक बना सकता है। भिखारी का पूरा हक मंदिर का पूजारी ले रहा है। भिखारी हमेशा भिखारी नहीं रहा है, कभी तो वह धनवान भी रहा होगा, वह कभी माँ के पेट से भिखारी पैदा नहीं हुआ होगा। जब मंदिर सबका है, ईश्वर सबका है तो हिस्सा भी सबका है। मंदिर के अंदर पूजारी भगवान को मनाता है, बाहर बैठा भिखारी भगवान को हर पल याद करता है, हिस्सा बराबर बनता है, इसलिये तो मंदिर में हिस्सा है भिखारी का। सिद्धार्थ बागड़े Tags : whom lives God outside beggars temple worshiped Poojari