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पेरियार ई. वी. रामास्वामी के विचार

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Saturday, May 11, 2019, 04:47 PM
Periyar Ramaswami

पेरियार ई. वी. रामास्वामी के विचार  
1.    ब्राह्मण आपको भगवान के नाम पर मूर्ख बनाकर अंधविश्वास में निष्ठा रखने के लिए तैयार करता है और स्वयं आरामदायक जीवन जी रहा है, तुम्हें अछूत कहकर तुम्हारी निंदा करता है। देवता की प्रार्थना करने के लिए दलाली करता है। मैं इस दलाली की निंदा करता हूँ और आपको भी सावधान करता हूँ कि ऐसे ब्राह्मणों का विश्वास मत करो।
2. उन देवताओं को नष्ट कर दो जो तुम्हें शूद्र कहें, उन पुराणों ओर इतिहास को ध्वस्त कर दो, जो देवताओं को शक्ति प्रदान करते हैं. अगर देवता ही हमें निम्न जाति बनाने के लिये जिम्मेदार हैं तो ऐसे देवताओं को नष्ट कर दो, अगर धर्म है तो इसे मत मानो, अगर मनुस्मृति, गीता या अन्य कोई पुराण आदि है तो इसको जलाकर राख कर दो. अगर ये मंदिर, तालाब या त्यौहार है तो इनका बहिष्कार कर दो। अगर हमारी राजनीति ऐसा करती है तो इसका खुले रूप में पर्दाफाश करो।
3. संसार का अवलोकन करने पर पता चलता है कि भारत जितने धर्म और मत मतान्तर कहीं भी नहीं हैं और यही नहीं, बल्कि इतने धर्मांतरण (धर्म परिवर्तन ) दूसरी जगह कही भी नही हुए हैं। इसका मूल कारण भारतीयों का निरक्षर ओर गुलामी प्रवृति के कारण उनका धार्मिक शोषण करना आसान है।
4. आर्यो ने हमारे ऊपर अपना धर्म थोपकर, असंगत, निर्थक और अविश्वनीय बातों में हमें फांसा। अब हमें इन्हें छोड़कर ऐसा धर्म ग्रहण कर लेना चाहिए जो मानवता की भलाई में सहायक सिद्ध हो।
5. ब्राहमणों ने हमें शास्त्रों ओर पुराणों की सहायता से गुलाम बनाया है और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए मंदिर, ईश्वर और देवी-देवताओं की रचना की।
7. सभी मनुष्य समान रूप से पैदा हुए हैं, तो फिर अकेले ब्राह्मण ऊँच व अन्यों को नीच कैसे ठहराया जा सकता है।
8. संसार के सभी धर्म अच्छे समाज की रचना के लिए बताए जाते है, परन्तु हिंदू-आर्य, वैदिक धर्म में हम यह अंतर पाते हैं कि यह धर्म एकता और मैत्री के लिए नहीं है।
9. ऊँची-ऊँची लाटें किसने बनवाईं? मंदिर किसने बनाए? क्या ब्राहमणों ने इन मंदिरों, तालाबों या अन्य परोपकारी संस्थाओं के लिए एक रुपया भी दान दिया ?
10. ब्राह्मणों ने अपना पेट भरने हेतु अस्तित्व, गुण, कार्य, ज्ञान और शक्ति के बिना ही देवताओं की रचना करके और स्वयभू भूदेवता बनकर हंसी मजाक का विषय बना दिया है।
11. सभी मानव एक हैं, हमें भेदभाव रहित समाज चाहिए, हम किसी को प्रचलित सामाजिक भेदभाव के कारण अलग नहीं कर सकते।
12. हमारे देश को वास्तविक आजादी तभी मिली समझाना चाहिए, जब ग्रामीण लोग, देवता, अधर्म, जाति और अंधविश्वास से छुटकारा पा जायेंगे।
13. आज विदेशी लोग दूसरे ग्रहों पर सन्देश और अंतरिक्ष यान भेज रहे है। हम ब्राह्मणों के द्वारा श्राद्धो द्वारा परलोक में बसे अपने पूर्वजों को चावल ओर खीर भेज रहे हैं. क्या ये बुद्धिमानी है ?
14. ब्राह्मणों से मेरी यह विनती है कि अगर आप हमारे साथ मिलकर नहीं रहना चाहते तो आप भले ही जहन्नुम में जाऐं, परन्तु कम से कम हमारी एकता के रास्ते में मुसीबतें खड़ी न करें।
15. ब्राह्मण सदैव ही उच्च एवं श्रेष्ट बने रहने का दावा कैसे कर सकता है ? समय बदल गया है, उन्हें नीचे आना होगा, तभी वे आदर से रह पायेंगे नहीं तो एक दिन उन्हें बलपूर्वक और देशाचार के अनुसार ठीक होना होगा।

ब्राम्हण आपको भगवान के नाम पर मुर्ख बनाकर अंधविश्वास में निष्ठा रखने के लिए तैयार करता है और स्वयं आरामदायक जीवन जी रहा है, तथा तुम्हे अछूत कहकर निंदा करता है। देवता की प्रार्थना करने के लिए दलाली करता है। मै इस दलाली की निंदा करता हॅू और आपको भी सावधान करता हॅू कि ऐसे ब्राम्हणों का विश्वास मत करों।
    उन देवताओं को नष्ट कर दो जो तुम्हे शूद्र कहे, उन पुराणों और इतिहास को ध्वस्त कर दो, जो देवता को शक्ति प्रदान करते है। उस देवता कि पूजा करो जो वास्तव में दयालु भला और बौद्धगम्य है।
    ब्राम्हणों के पैरों में क्यों गिरना ? क्या ये त्यौहार है ? नही, ये सब कुछ भी नही है। हमें बुद्धिमान व्यक्ति की तरह व्यवहार करना चाहिए यही प्रार्थना का सार है।
    अगर देवता ही हमें निम्न जाति बनाने का मूल कारण है तो ऐसे देवता को नष्ट कर दो, अगर धर्म है तो इसे मत मानों, अगर मनुस्मति, गीता, या अन्य कोई पुराण आदि है तो इसको जलाकर राख कर दो। अगर ये मंदिर, तालाब या त्यौहार है तो इनका बहिष्कार कर दो। अंत में हमारी राजनीति ऐसी करती है तो इसका खुले रूप में पर्दाफाश करों।
    उसकी चोटी पर सुनहरी परत किसने चढाई ? क्या ब्राम्हणों ने इन मंदिरों, तालाबों या अन्य परोपकारी संस्थाओं के लिए एक रूपया भी दान दिया ?
    ब्राम्हणों ने अपना पेट भरने हेतु अस्तित्व, गुण, कार्य, ज्ञान और शक्ति के बिना ही देवताओं की रचना करके और स्वयंभू भुदेवता बनकर हंसी मजाक का विषय बना दिया है।
    सभी मानव एक है हमें भेदभाव रहित समाज चाहिए, हम किसी को प्रचलित सामाजिक भेदभाव के कारण अलग नही कर सकते।
    हमारे देश को आजादी तभी मिल गई समझना चाहिए जब ग्रामीण लोग, देवता, अधर्म, जाति और अंधविश्वास से छुटकारा पा जायेंगे।
    आज विदेशी लोग दूसरे ग्रहों पर सन्देश और अंतरिक्ष यान भेज रहे है और हम ब्राम्हणों के द्वारा श्राद्धों में परलोक में बसे अपने पूर्वजों को चावल और खीर भेज रहे है। क्या ये बुद्धिमानी है ?
    ब्राम्हणों से मेरी यह विनती है कि अगर आप हमारे साथ मिलकर नही रहना चाहते तो आप भले ही जहन्नुम में जाए। कम से कम हमारी एकता के रास्ते में मुसीबते खडी करने से तो दूर जाओं।
    ब्राम्हण सदैव ही उच्च एवं श्रेष्ठ बने रहने का दावा कैसे कर सकता है ? समय बदल गया है, उन्हें नीचे आना होगा, तभी वे आदर से रह पायेंगे, नही तो एक दिन उन्हें बलपूर्वक और देशाचार के अनुसार ठीक होना होगा।
नास्तिकता मनुष्य के लिए कोई सरल स्थिति नहीं है, कोई भी मुर्ख अपने आप को आस्तिक कह सकता है, ईश्वर की सत्ता स्वीकार करने में किसी बुद्धिमत्ता की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन नास्तिकता के लिए बड़े साहस और दृढ़ विश्वास की जरूरत पड़ती है, यह स्थिति उन्ही लोगों के लिए संभव हैं जिनके पास तर्क तथा बुद्धि की शक्ति हो ! 
- पेरियार रामास्वामी





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