वामन मेश्राम TPSG Sunday, June 2, 2019, 08:29 AM मेरी यह राय है कि मनुष्य ने मनुष्य ही रहना चाहिए। मनुष्य जैसे ही ब्राह्मण बनेगा, समस्या शुरू हो जाती है। इसलिए कुछ ब्राह्मण अच्छे होते हैं, कुछ गलत होते हैं, मूलतः यह सिद्धान्त ही गलत है। मनुष्य का ब्राह्मण बनना ही गलत है। मनुष्य ने हमेशा मनुष्य ही बनने का प्रयास करना चाहिए। अधिक से अधिक अच्छा मनुष्य बनने का प्रयास करना चाहिए। अच्छा मनुष्य बनने के लिए लोगों की सेवा करनी चाहिए। सेवा के माध्यम से अच्छा मनुष्य बना जा सकता है। - वामन मेश्राम - तुम किसी को अछूत कहतो हो, किसी को स्पर्श नहीं करते हो यह भी धर्म है। तुम दूसरों को नीच मानते हो यह भी धर्म है। एक दूसरे के साथ गैर बराबरी का व्यवहार करते हो यह भी धर्म है। किसी आदमी के साथ इन्सानियत से पेश नहीं आते हो, उसके साथ जानवरों जैसा व्यवहार करते हो, यह भी धर्म है। क्या यह कहीं से भी, किधर से भी धर्म नजर नहीं आता। जिधर से देखो उधर से केवल और केवल धर्म के नाम से षडयंत्र नजर आता है। - वामन मेश्राम - जब ब्राह्मण हिन्दुत्व का नारा लगाते हैं तब हिंदू कहने वाले लोग उसे धर्म के साथ जोड़ देते हैं और हमारे ऊपर ब्राह्मणो का प्रभाव हो जाता है। जब ब्राह्मण सांस्कृतिक राष्ट्रवाद कहते हैं इसका मतलब यह होता है जाति और वर्ण यह सांस्कृतिक घटक है वो ऐसा कहना चाहते है कि जाति और वर्ण दो आधार पर बने हुए राष्ट्र को उस विचार को राष्ट्रवाद मानते हैं, अगर ब्राह्मण ने इस बात को खुले आम विश्लेषण कर कहा तो हमारे लोग उसके विरोध में हो जायेंगे। मगर ब्राह्मण यह कहते हैं कि हम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद निर्माण करना चाहते है तो हमारे लोग उनके झांसे में फंस जाते हैं। इस तरह से ब्राह्मणों ने हमारे लोगों को जाल में फंसाने के लिए नये भाषा शास्त्र का निर्माण किया। हम लोग कभी विस्तार में जाते नहीं विस्तार में विचार करने के लिए हमारे लोग अपना दिमाग लगाते नहीं है। ब्राह्मणों ने हिन्दुत्व के आवरण में छिपकर हमारे विशाल जनसंख्या को मूर्ख बनाने के लिए ब्राह्मण धर्म का हिन्दू धर्म ऐसा नामांतर कर दिया। केवल नामांतर करने की वजह से ही हमारे लोग ब्राह्मणों के झांसे में फंस गये। अगर ब्राह्मण अपने धर्म का नाम वैदिक धर्म या ब्राह्मण धर्म रखते तो हमारे लोग ब्राह्मणों के झांसे में नहीं फंसते। - वामन मेश्राम - बहुत सारे लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि तथागत बुद्ध ‘क्षत्रिय’ थे। किन्तू यह सही नहीं है। तथागत बुद्ध ‘क्षत्रिय’ नहीं थे। बुद्ध ‘गण-संस्था’ के सदस्य थे और गण संस्था ‘वर्ण-संस्था’ को मान्यता नहीं देती थी। वर्ण-संस्था के अधीन यदि राजा बनना है तो राजा बनने वाले व्यक्ति का क्षत्रिय होना यह अनिवार्य पूर्व शर्त थी। किन्तू गण-संस्था के अंतर्गत राजा बनने के लिए ऐसी कोई पूर्वशर्त नहीं थी, क्योंकि ‘गण-संस्था’ में राजा बनने वाला व्यक्ति ‘रोटेशन’ पद्धति से राजा बनने की परंपरा थी। तथागत बुद्ध के पिता शुद्धोधन उस समय एक प्रान्त के राजा थे। गण-संस्था की वजह से वे राजा बने। हमारे लोग क्या सोंचते हैं? यदि तथागत बुद्ध के पिता राजा थे तो यकीनन वे क्षत्रिय रहे होंगे। मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग दिखावे के लिए तथागत बुद्ध को मानते हैं मगर उनके सोंचने का तरीका पूरी तरह से ब्राह्मणवादी है। - वामन मेश्राम - मै ब्राह्मणो को चुनौती देता हु कि वो साबित करे SC, ST, OBC और मराठा-कुणबी के लोग हिंदू है - मा. वामन मेश्राम - राजपुरोहित नारायण भट्ट ने कहा – महाराज आप शूद्र हैं । शूद्रों के लिए पुराण मंत्र ही कहे जाते हैं और पुराणमंत्रों के उच्चारण हेतु हम ब्राह्मणो को स्नान करने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम जन्मतः पवित्र होते हैं। शूद्रों को वेद मंत्र का अधिकार नहीं है। छत्रपति शिवाजी महाराज को हमने सिर्फ उन्हीं के लिए “क्षत्रियत्व” की सुविधा प्रदान की थी। जब तक सर्व शक्तिमान ब्राह्मणवृंद आपको क्षत्रिय नहीं मानते तब तक आप शूद्र ही हैं। राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज को तत्क्षण महसूस हुआ कि उनपर वज्रपात हुआ है। साक्षात छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज को एक सामान्य पुरोहित शूद्र कहकर अपमानित कर रहा है, अवहेलना कर रहा है। महाराज को उसी क्षण महसूस हुआ कि जिस समाज में मेरे जैसे राजपरिवार के लोगों की गणना शूद्र कहकर की जाती हो वहाँ बहुजन समाज... जिन्हें हजारों वर्षों से शूद्र-अतिशूद्र कहा जाता है उनके साथ ये ब्राह्मण लोग कैसा व्यवहार करते होंगे? इस विचार के आते ही उनका कलेजा फट गया। किस तरह का ब्राह्मण उनका शूद्र कहकर अपमान कर रहा था? वह जो उनका नौकर था। वह जो उनकी नोकरी कर रहा था, वह जो उनके दिये अन्न पर पल रहा था। जो छत्रपति महाराज का अन्न खा रहा था वह राजपुरोहित नारायण भट्ट खुद अपने स्वामी का,अपने मालिक का,अपने अन्नदाता का शूद्र कहकर अपमान कर रहा था। यह दुस्साहस व उड़ंदता वह क्यों कर रहा था? कारण था धर्म। कौनसा धर्म? ब्राह्मणी धर्म। आज इसी ब्राह्मणी धर्म को हिन्दू धर्म कहा जाता है। इस ब्राह्मणी धर्म में अर्थात हिन्दू धर्म में केवल और केवल ब्राह्मण ही श्रेष्ठ हैं शेष सभी ब्राह्मणेत्तर निकृष्ट हैं। ब्राह्मण धर्म अर्थात हिन्दू धर्म में सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मणो का फायदा व शेष का कोई फायदा नहीं है। इस ब्राह्मणी धर्म अर्थात हिन्दू धर्म में ब्राह्मण स्वामी तथा ब्राह्मणेत्तर गुलाम हैं ऐसा ही विधान है। इसीलिए यह ब्राह्मण धर्म एक धर्म नहीं बल्कि एक षड्यंत्र है। -वामन मेश्राम Tags : starts problem Brahmin human man opinion