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पेरियार रामास्वामी ने समझाया अपनी पत्नी को

TPSG

Friday, May 10, 2019, 09:09 AM
Periyar ji of wife

पेरियार रामास्वामी ने समझाया अपनी पत्नी को

विवाह होने के पश्चात जब उनकी 13 वर्षीय पत्नि नागम्मई दुल्हन बनकर ससुराल आई तो उसके सामने दो संस्कृतियो का संगम था अन्धविश्वास की सौगात उसे नैहर और ससुराल में विरासत में मिली थी। अपने पति का धर्म के प्रति चिंतन ने उन्हें भी सोचने पर बाध्य कर दिया। वे दो पाटो में पीसी जा जा रही थी। दशहरा जैसे जुलूशो पर जब भारत की जनता ताजियों की तरह रावण के पुतले हिन्दू धर्म के अनुसार दफनाते थे तो पेरियार राम का पुतला जलाते थे।
माता नागम्मइ को प्रारम्भ में यह देखकर बहुत बुरा लगता था पर पेरियार जब अपनी पत्नि को समझाते कि अगर हम तुम्हे गर्भावस्था में जंगल में छोड़ दें तो क्या तुम फिर भी हमारी ही पूजा करोगी। अगर हम तुम्हे जुए के दाव पर लगाकर हार जाये तो क्या तुम फिर भी हमे धर्मराज कहोगी। अगर हमारे पांच भाई होते और तुम उन सबकी बारी बारी से पत्नि बनती तो क्या तुम्हे गीता पर अडिग विश्वास रहता।  मैं अगर दशरथ या भीष्म की तरह किसी ऋषि के पास गर्भाधान के लिये तुम्हे ले चलता तो क्या तुम फिर भी हिन्दू धर्म को ही महान कहती। माता नागम्मइ के पास पेरियार के इन प्रश्नो का कोई उत्तर नही था। अपने तर्को द्वारा पेरियर ने उनके ह्रदय को परिवर्तित कर दिया। बहुत पढ़े लिखे या अनपढ़ व्यक्ति का ह्रदय परिवर्तन आसानी से किया जा सकता है किन्तु मध्यम वर्ग के पढ़े लिखे व्यक्ति को बदल पाना आसान नही है। यही कारण है कि भारत के विद्यालयो से निकले करोड़ो लोगो के पास तर्क का अभाव है। ब्राह्मणी व्यवस्था उन करोड़ो लोगो को इतनी शिक्षा देकर बाहर फेंक देती है। गांव के चबूतरों खेत खलिहानों एवं चाय की दुकानों में ब्राह्मणी व्यवस्था के सबसे बड़े प्रवक्ता वे ही होते है जिनके पास तर्क करने की जरा भी क्षमता नही हुआ करती। 
- शशि बौद्ध 

 





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