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महाराष्ट्र में हाजी मस्तान की मौत और तीन दशक बाद फिर बना दलित-मुस्लिम का नया मंच

Bureau report

Saturday, March 16, 2019, 08:07 AM

महाराष्ट्र में 1984 में अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान और दलित नेता जोगेंद्र ने दलित-मुस्लिम गठबंधन की एक नींव रखी थी। हाजी मस्तान की मौत के बाद यह गठबंधन भी डूबता चला गया। लगभग तीन दशक के बाद अब प्रकाश आंबेडकर और ओवैसी ने फिर से दलित-मुस्लिम को जोड़ा है।

 

हाइलाइट्स

  • महाराष्ट्र में प्रकाश आंबेडकर और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बनाया गठबंधन
  • राज्य में अंडर वर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान और दलित नेता जोगेंद्र कवाडे के बाद यह पहला प्रयोग है
  • तीन दशक पहले मस्तान और कवाडे का गठबंधन अंडर वर्ल्ड डॉन के निधन के बाद खत्म हो गया था
  • लोकसभा चुनाव में आंबेडकर और ओवैसी के गठबंधन से मुकाबला दिलचस्प हो सकता है

मुंबई 
तो क्या महाराष्ट्र में तीन दशक बाद एकबार फिर से दलित-मुस्लिम का गठजोड़ बन रहा है? इसी तरह का गठजोड़ तीन दशक पहले अंडर वर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान और दलित नेता जोगेंद्र कवाडे ने मिलकर दलित-मुस्लिम अल्पसंख्यक सुरक्षा महासंघ बनाया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ऐसा ही मजलिसे-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के असदुद्दीन ओवैसी और बीआरपी बहुजन महासंघ के प्रकाश आम्बेडकर के बीच हो रहा है। इस गठबंधन ने 30 साल पहले के उस दौर की याद दिला दी है। दोनों दलों के बीच गठबंधन को दलित-मुस्लिम गठजोड़ के रूप में देखा जा रहा है। आंबेडकर ने राज्य में एनसीपी और कांग्रेस से गठबंधन से इनकार कर AIMIM के साथ गठजोड़ किया है। दोनों दल मजबूती के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने वाले हैं। देखना दिलचस्प होगा कि राज्य में इस गठजोड़ को जनता कैसा रिस्पॉन्स देती है। बहरहाल, लोकसभा चुनाव में इस गठजोड़ के बनने के बाद मुकालबा त्रि-स्तरीय दिखाई दे रहा है।

 

तीन दशक पहले ऐसे बना था महासंघ

 

महाराष्ट्र में दलित-मुस्लिम तीन दशकों बाद वापस एक साथ आए हैं। 1984 के भिवंडी दंगों के बाद, किंगपिन हाजी मस्तान मिर्जा और दलित नेता जोगेंद्र कवाडे ने मिलकर दलित-मुस्लिम अल्पसंख्यक सुरक्षा महासंघ का गठन किया। महाराष्ट्र में पठानों और मिल-लैंड महाराष्ट्रियन गैंग फैलने के बाद बूढ़ा हो चुका मस्तान बॉम्बे अंडरवर्ल्ड से बाहर निकलना चाह रहा था। 

मिर्जा ने छोड़ दी थी तस्करी 
पीपल्स रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष 75 वर्षीय कवाडे ने कहा, 'यह देश के राजनीतिक इतिहास में एक नया अनुभव था। मुझे बाबासाहेब आंबेडकर के बाद औरंगाबाद में मराठवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए जाना जाता था। मेरे प्रयास के बाद मिर्जा ने तस्करी छोड़ दी थी और हज गया। उसने अपनी छवि बदल ली। मैं महासंघ का सह-संस्थापक बन गया।' 

 

p> ब्यूरो रिपोर्ट 

 

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Tags : Haji Mastan Maharastra