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मानव सभ्यता बड़ी कठिनाई

Rajendra Prasad Singh

Monday, February 15, 2021, 02:55 PM
hareram singh

विद्यापति की नायिका अंगुलियों पर दिन गिनती है, भिखारी ठाकुर की नायिका भी अंगुलियों पर दिन गिनती है, अनेक कवियों की नायिकाएँ अंगुलियों पर दिन गिनती हैं......

दिनवा गिनत मोरी घिसली अंगुरिया रे, रहिया तकत नैना झरै रे बिदेसिया ---- तुम्हारे आने के दिन गिनते - गिनते मेरी अंगुलियाँ घिस गई हैं.....

वो दिन थे, जब अंगुलियों पर लोग दिन की गणना करते थे, पाँच अंगुलियों का समूह पंजा है, इसी पंजा से पंज ( पाँच ) बना है....

पंजाबी, सिंधी में पाँच को " पंज " बोलते हैं, फारस वाले भी पाँच को पंज बोलते हैं, खुद पंजाब में पंज है.....

एक हाथ की पाँच अंगुलियों को " पंजा " कहते हैं और दोनों हाथ की दस अंगुलियों में लोग " दस्ताना " पहनते हैं....

दस का संबंध हाथ से है, फारसी में " दस्त " का मतलब " हाथ " होता है, इसी से दस्तकारी, दस्तक और दास्ताने जैसे शब्द बने हैं...

यही " दस " अफगानिस्तान की पश्तो भाषा में " लस " है, लस का एक अर्थ हाथ और दूसरा अर्थ दस की संख्या होती है.....

अब कोई शक नहीं कि एक हाथ की पाँच अंगुलियों की गिनती पंज है और दोनों हाथ की दस अंगुलियों की गिनती दस है....

मानव सभ्यता बड़ी कठिनाई अंगुलियों पर दिन गिनते - गिनते कंप्यूटर तक पहुँची है, इसे बरकरार रखना मानव प्रजाति की नैतिक जिम्मेदारी है.....





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