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जाँचने की आलोचना

Rajendra Prasad Singh

Thursday, July 22, 2021, 12:04 PM
Paddati

मार्क्स के नजरिए से हिंदी साहित्य को जाँचने की आलोचना - पद्धति आई।

फ्रायड के नजरिए से हिंदी साहित्य को जाँचने की आलोचना - पद्धति आई।

शास्त्र के नजरिए से हिंदी साहित्य को जाँचने की आलोचना - पद्धति आई।

मगर बुद्ध के नजरिए से हिंदी साहित्य को जाँचने की आलोचना - पद्धति अभी नहीं आई है।

जब तक बुद्ध के नजरिए से हिंदी साहित्य को जाँचने की आलोचना - पद्धति नहीं आएगी, तब तक कबीर का सही मूल्यांकन नहीं हो पाएगा और कबीर वैष्णव बने रहेंगे।

हम ये भी नहीं जान पाएंगे कि मैथिलीशरण गुप्त ने यशोधरा का वैष्णवीकरण कैसे किया - सखी, वे मुझसे कहकर जाते!





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