सम्राट अशोक का पांगुरारिया शिलालेख TPSG Sunday, July 28, 2019, 01:52 PM सम्राट अशोक का पांगुरारिया शिलालेख (सलकनपुर, ज़िला सिहोर, म. प्र. से तीन कि.मी. दूर) पांगुरारिया शिलालेख की मूल ब्राम्ही लेख और उसका देवनागरी लिप्यंतरण (लघु शिलालेख के ऊपरी शिला पर लेख) पियदसि नाम राजकुमार व संवसमाने (इ) मं देस पपुनिथ विहार याताये हिंदी अनुवाद -- प्रियदर्शी नामक युवराज अपनी सहचारिणी के साथ इस प्रदेश में पर्यटन हेतु आये थे। ये शिलालेख मध्यप्रदेश के भोपाल के नज़दीक दक्षिण पूर्व में लगभग 60 कि.मी. या होशंगाबाद शहर के पास, सलकनपुर के पहाड़ी इलाके में, नक्तितलाई नाम के छोटे से गांव के पास मिला है। सम्राट अशोक का पांगुरारिया लघु शिलालेख ऊपरी भाग में दिखाई देता है। अन्यत्र मिले शिलालेखों से इसका आलेख मिलता जुलता है, सो मूल ब्राह्मी लेख व उसका अनुवाद यहां नहीं दिया जा रहा है। लेकिन शिलालेख से ढाई मीटर ऊंचाई पर पांच पंक्तियों का केवल आठ शब्दों का लेख है, जो विशेष है। इनके अक्षर आकार में बड़े और ऊबड खाबड़ हैं। ये लेख सम्राट अशोक के लेखननविसों ने उकेरा होगा ऐसा प्रतीत नहीं होता। शायद आसपास के बाशिदों ने उकेरा होगा ऐसा लगता है। लेख के आशय से इसकी पुष्टि होती है। इस शिलालेख के अनुसार, सम्राट अशोक जो युवराज थे, अपनी मित्र विदिशादेवी के साथ, जो स्वयं बौद्ध परंपरा में दीक्षित थीं तथा भिक्खु संघ के साथ यहां आते रहे हैं। ---------------- मराठी पोस्ट :अशोक तपासे हिन्दी रूपांतरण :राजेंद्र गायकवाड़ Tags : tradition Buddhist Vidishadevi emperor inscription