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रुपीअम्म का शिलालेख 

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Tuesday, August 6, 2019, 04:36 PM
Rupiamm silalekh

रुपीअम्म का शिलालेख 

विदर्भ में बुद्ध धम्म का अध्ययन करते हुए, निगाहें अनेक ऐसे स्थलों तक जाती हैं जो द्रष्टव्य और उल्लेखनीय हैं। इनमें प्रमुख है पवनी और मनसर के आसपास का इलाक़ा। 
चक्रवर्ती सम्राट अशोक के पूर्वकालीन स्तूप आज भी यहां टेकड़ी के रूप में हमें दिखाई पड़ते हैं ।पवनी का जगन्नाथ मंदिर ऐसे ही एक स्तूप पर बनाया गया है। विदर्भ में आज भी ऐसे स्थान हैं जो आज उत्खनन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इधर के उत्खनन में यहां रोम के सिक्के मिले हैं। 
इसका मतलब साफ़ है कि यहां दुनिया भर से व्यापारी आते रहे हैं।यहां बहुत से राजा -महाराजा हो चुके हैं। यहां खासकर एक शिलालेख का उल्लेख करना समीचीन होगा -पवनी में प्राप्त एक शिलालेख, विदर्भ में नियुक्त 
प्रांताधिकारी "रूपीअम्म "का है। 
महाक्षत्रप "रूपीअम्म" शकवंशीय थे और "कुषाणों"ने उन्हें प्रांताधिकारी के रूप में विदर्भ में नियुक्त किया था। 
रूपीअम्म का छाया स्तंभ (प्रतिमायुक्त स्तंभ) लेख आज नागपूर के वस्तु संग्रहालय में रखा गया है। वैसे निरीक्षण के क्रम में प्रेक्षकों से सहसा ये नज़रअंदाज़ हो जाता है। 
ये शिलालेख ईस्वी सन् दूसरी सदी का है। कुषाण कुछ 
समय तक विदर्भ के शासक थे शिलालेख से ये प्रमाणित होता है। 
ये शिलालेख धम्मलिपी में उकेरा गया है। (ब्राह्मी ) नागपूर संग्रहालय में ये शिलालेख दालान में रखा गया है। 
देखरेख के अभाव में ऐसा महत्वपूर्ण शिलालेख नष्ट होने की स्थिति में है। 
संग्रहालय में खोजकर देखने पर ही ये शिलालेख हम 
देख सकते हैं....ऐसी अनेक अनमोल वस्तुएं विदर्भ की 
भूमि में दबी हैं और उत्खनन से बाहर आने का इंतजार 
कर रही है ।

---------------------------सूरज रतन जगताप 
09320213414
प्रस्तुति :राजेंद्र गायकवाड़ 

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