बौद्ध भिक्खु का मतलब श्रामण कारक Rajendra Prasad Singh Saturday, May 25, 2019, 07:02 AM बौद्ध भिक्खु का अर्थ भीखमंगा नहीं है। यह गलत व्याख्या है। पूरा जापान बौद्ध भिक्खुओं से भरा पड़ा है। जापान भीख मांग रहा है ? जापान तो आपको दे रहा है। अरुणाचल प्रदेश के मोंपा बौद्ध हैं। वे भीख मांग रहे हैं क्या ? आप नालंदा, राजगीर, गया, सारनाथ गए होंगे। आपने देखा है किसी बौद्ध भिक्खु को भीख मांगते हुए ? भारत में हिमालय के पाद - प्रदेश में बसे खाम्ती, तामंग या मोंपा सभी बौद्ध भिक्खु ही हैं। आपने देखा है इनको भीख मांगते हुए ? ये सभी श्रमशील और खेतिहर जातियाँ हैं। बौद्ध भिक्खुओं को आखिर क्यों श्रमण कहा जाता है ? श्रमण का क्या अर्थ होता है भिखमंगा होता है क्या ? जी, नहीं। श्रमण का अर्थ श्रम करने वाला होता है। आप श्रमण को भिखमंगा किस आधार पर कह रहे हैं ? काम - धाम में जो धाम है, वह धम्म ही है। घर का बोधक नहीं है। काम करने का बोधक है जैसा कि काम- काज में है। आपको पता होगा कि इसी तर्ज पर उर्दू में भी एक शब्द प्रचलित है - फकीर। फकीर लोग मितव्ययी और संत होते हैं। फकीर को आप भिखमंगा नहीं कह सकते हैं। ऐसे भी भिक्खु का अर्थ बौद्ध संत - संन्यासी ही होता है, भिखारी या भिखमंगा कभी नहीं। ये संस्कृत नजरिए से भिक्खु का अर्थ भिखमंगा हुआ है। - राजेन्द्र प्रसाद सिंह Tags : agricultural laborious India monk Buddhist Sarnath Gaya Rajgir Nalanda