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पहले के शिलालेख प्राकृत भाषा में

Rajendra Prasad Singh

Tuesday, December 14, 2021, 04:19 PM
Prakrit language

भारतीय शिलालेखों के मामूली जानकार भी धड़ल्ले से बता देगा कि ईसा से पहले के शिलालेख प्राकृत भाषा में हैं जैसे मौर्य - सातवाहनों के शिलालेख।

ईसा के आसपास के शिलालेख पिजिन संस्कृत में हैं जैसे मथुरा के शक और कुषाणों के शिलालेख।

ईसा के बाद के शिलालेख संस्कृत में हैं जैसे रुद्रदामन और समुद्रगुप्त के शिलालेख।

यह संयोग नहीं कि ईसा के आसपास जब शिलालेखों में पिजिन संस्कृत का प्रचलन था, तब साहित्य में भी पिजिन संस्कृत का प्रचलन था जिसमें प्राकृत और संस्कृत का मिश्रण है, जहाँ शब्द खास तौर पर संस्कृत के ध्वन्यात्मक रूप में ढाल दिए गए हैं, किंतु व्याकरण का ढाँचा प्राकृत का है।

यदि संस्कृत का अस्तित्व प्राकृत से पहले होता तो पिजिन संस्कृत का प्रचलन पुरातत्व और साहित्य दोनों में ईसा के आसपास नहीं बल्कि ईसा से सैकड़ों साल पहले होता।

मगर ईसा से पहले संस्कृत जैसी कोई क्लासिक भाषा नहीं थी। इसीलिए पिजिन संस्कृत का प्रचलन पुरातत्व और साहित्य दोनों में ईसा के आसपास होता है।

दिशा उल्टी है। आपको संस्कृत से प्राकृत की ओर नहीं बल्कि प्राकृत से संस्कृत की ओर चलना होगा।

पिजिन संस्कृत पर टी. बरो और डाॅ. भोलानाथ तिवारी की पुस्तक के दो पन्ने प्रस्तुत हैं।





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