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अभिलेख

Pratap Chatse

Saturday, April 8, 2023, 05:58 PM
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जब अभिलेख लिखवाने वाला खुद कह रहा है कि  "इयं धंम लिपि" अर्थात यह #धम्मलिपि है । तो आप कौन होते हैं इसका ब्राह्मी लिपि नामकरण करने वाले ?

ब्राह्मी लिपि का नाम कभी ब्राम्ही के नाम से प्रचलित था, यह केवल आपको कुछ साहित्य में कुछ जगह नाम मिल जाएगा, वो भी बंभी लिपि नाम से मिलेगा ।

लेकिन यह लिपी "धम्म लिपि" के नाम से व्यापक रूप में प्रचलित था । यह आपको बुद्ध के महापरिनिब्बान के 180 वर्ष बाद ही #मौर्य_सम्राटअशोक के लगभग सभी शिलालेखों, स्तंभलेखों में मिलते हैं ।

सम्राट अशोक लगभग अपने सभी शिलालेख में लिखवाएं हैं कि "इयं धंम लिपि" अर्थात यह धम्म लिपि है । सुविधा के लिए चक्रवर्ती सम्राट अशोक के अभिलेख पर आप लाल घेरे में लिखा हुआ देख सकते हैं (चित्र) ।

फिर भी इतिहासकारों ने इस लिपि का वर्तमान नामकरण धम्मलिपि न करके ब्राह्मी लिपि किया, आखिर क्यों ?

क्योंकि धम्म लिपि नाम लोगों को सीधा "धम्म" से जोड़ती है । जब धम्म लिपि नाम किसी के जहन में रहेगा, तो जाहिर सी बात है कि धम्म क्या है और धम्म लिपि नाम कैसे पड़ा होगा, लोग जानना चाहेंगे, रिसर्च होगा और असली सच्चाई सामने आएगा । यह सच्चाई सामने न आए, इसलिए इसका नाम शिलालेखों वाला छोड़कर साहित्यों वाला लिया गया है ।





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